मध्यकालीन भारत का इतिहास - भक्ति एवं सूफी आंदोलन Part -3 (मीरा बाई, तुलसीदास, सूरदास एवं वल्लभाचार्य ,दादूदयाल, गुरु नानक, चैतन्य महाप्रभु, नरसी मेहता एवं शंकरदेव )
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| मध्यकालीन भारत का इतिहास - भक्ति एवं सूफी आंदोलन Part -3 (मीरा बाई, तुलसीदास, सूरदास एवं वल्लभाचार्य ,दादूदयाल, गुरु नानक, चैतन्य महाप्रभु, नरसी मेहता एवं शंकरदेव ) |
मीरा बाई, तुलसीदास, सूरदास एवं वल्लभाचार्य
🕉️ मीरा बाई
- जन्म – 1498 ई., कुड़की (पाली, राजस्थान)
- बचपन का नाम – पेमल दे
- पिता – राजा रतनसिंह
- पति – भोजराज (राणा सांगा के पुत्र)
- विवाह – 1516 ई.
भक्ति व जीवन
- भक्तिकाल की महान महिला संत
- तुलना – सूफी महिला संत राबिया से
- प्रथम गुरु – जीवस्वामी (चैतन्य सम्प्रदाय)
- बाद में आध्यात्मिक गुरु – रैदास / रविदास
- पति की मृत्यु के बाद कृष्ण भक्ति में पूर्णतः लीन
- कृष्ण को पति (प्रियतम) माना
- भक्ति का स्वरूप – माधुर्य एवं कांत भाव
साहित्य
- भक्ति गीत – पदावली
- भाषा – राजस्थानी मिश्रित ब्रज
- रस – वियोग श्रृंगार एवं शान्त
अंत
- द्वारिका में रणछोड़ाय मंदिर में विलीन (किंवदंती)
प्रमुख ग्रंथ
- नरसी जी रो मायरो
- गीत गोविन्द की टीका
- राग गोविन्द
- मीरा बाई का मल्हार
- राग सोरठा
- सत्यभामा रो रूसणो
- रुक्मणी मंगल
🕉️ तुलसीदास
- जन्म – 1511 / 1532 ई.
- जन्म स्थान – राजापुर (वर्तमान कासगंज, उ.प्र.)
- पिता – आत्माराम दुबे
- माता – हुलसी देवी
- पत्नी – रत्नावली
- गुरु – नरहरिदास (अयोध्या)
- बचपन का नाम – रामबोला
- समकालीन – अकबर
प्रमुख कृति
- रामचरितमानस –
- भाषा – अवधी
- रचना वर्ष – 1574 ई. (वि.सं. 1631)
- रचना काल – 2 वर्ष 9 माह 26 दिन
- अन्य नाम – तुलसी रामायण
- श्लोक – 10902
- संसार के सर्वश्रेष्ठ 100 ग्रंथों में 46वाँ स्थान
कांड (7)
- बालकाण्ड (सबसे बड़ा)
- अयोध्याकाण्ड
- अरण्यकाण्ड
- किष्किंधा (सबसे छोटा)
- सुन्दरकाण्ड
- लंकाकाण्ड / युद्धकाण्ड
- उत्तरकाण्ड
उपाधि व दर्शन
- “अभिनव वाल्मीकि”
- दर्शन – विशिष्टाद्वैत
मृत्यु
- अस्सी घाट, काशी
- तुलसीदास मंदिर – काँच मंदिर (चित्रकूट)
प्रमुख ग्रंथ
- रामाज्ञा प्रश्न
- वैराग्य संदीपनी
- दोहावली
- कवितावली
- कृष्ण गीतावली
- गीतावली
- पार्वती मंगल
- जानकी मंगल
- रामलला नहछू
- बरवै रामायण
- हनुमान बाहुक
- विनयपत्रिका (अंतिम ग्रंथ)
🕉️ सूरदास
- जन्म – 1478 ई.
- जन्म स्थान – रूकनाता (आगरा)
- निवास – आगरा-मथुरा मार्ग पर सीही गाँव
- पिता – रामदास
- बचपन का नाम – मदनमोहन
भक्ति
- श्रीकृष्ण के सगुण भक्त
- हिन्दी साहित्य के सूर्य माने जाते हैं
- सम्पूर्ण काव्य – ब्रज भाषा
प्रमुख ग्रंथ
- सूरसागर (सबसे प्रसिद्ध – अकबर काल)
- सूरसारावली
- साहित्य लहरी
अन्य तथ्य
- समकालीन – अकबर एवं जहाँगीर
- मृत्यु – 1583 ई., पारसौली (गोवर्धन, उ.प्र.)
- विठ्ठलनाथ का कथन –
“पुष्टि मार्ग को जहाज जात है…”
🕉️ वल्लभाचार्य
- जन्म – 1479–1531 ई.
- मूल स्थान – तेलंगाना (ब्राह्मण परिवार)
- पिता – लक्ष्मणभट्ट
- माता – इल्लमा देवी
- शिक्षा – काशी
मत / दर्शन
- शुद्धाद्वैतवाद
ऐतिहासिक संदर्भ
- समकालीन – विजयनगर सम्राट कृष्णदेवराय
कृष्णदेवराय के समय ग्रंथ –
- सुबोधिनी
- सिद्धान्त रहस्य
भक्ति परंपरा
- बाल कृष्ण की पूजा
- श्रीनाथजी के रूप में उपासना
- वृंदावन में श्रीनाथजी का मंदिर
- औरंगजेब (1668) के आदेश पर मूर्ति हटाई गई
- मूर्ति – उदयपुर → नाथद्वारा (राजसमंद)
संप्रदाय
- रुद्र सम्प्रदाय (प्रवर्तक – विष्णु स्वामी)
- पुष्टिमार्ग के अनुयायी
वल्लभाचार्य के उत्तराधिकारी
- पुत्र – विठ्ठलनाथ
- अकबर ने गोकुल व जैतपुरा की जागीरें दीं
- अष्टछाप मण्डली (1565 ई.)
अष्टछाप कवि
- कुंभनदास
- गोविन्दस्वामी
- सूरदास
- छीतस्वामी
- परमानन्द दास
- चतुर्भुज दास
- कृष्णदास
- नन्ददास
दादूदयाल, गुरु नानक, चैतन्य महाप्रभु, नरसी मेहता एवं शंकरदेव
- जन्म – 1544 ई., अहमदाबाद (साबरमती नदी तट)
- मृत्यु – 1603 ई., नरैना (जयपुर)
- पालक पिता – लोदीराम (ब्राह्मण)
- गुरु – बुड्ढन / ब्रह्मानंद (कबीर के प्रमुख शिष्य)
- उपाधि – राजस्थान का कबीर
दादूपंथ
- स्थापना – 1554 ई., नरैना (जयपुर)
- प्रधान पीठ – नरैना
- मूर्तिपूजा व जाति प्रथा का विरोध
शाखाएँ
- खालसा
- नागा
- खाकी
- उत्तरादे
- विरक्त
उपदेश एवं ग्रंथ
- दादू रा दूहा
- दादूवाणी – लगभग 5000 श्लोक
- भाषा – ढूँढाड़ी एवं सधुक्कड़ी (पश्चिमी हिन्दी)
अन्य तथ्य
- सत्संग स्थल – अलख दरीबा
- 52 शिष्य – 52 स्तम्भ
- प्रमुख शिष्य – सुन्दरदास, गरीबदास, रज्जब, मिस्किनदास, बालिन्द, बखना
- रज्जब का कथन – “यह संसार वेद है, यह सृष्टि कुरान है।”
- अकबर द्वारा फतेहपुर सीकरी आमंत्रण
- अकबर ने इनके प्रभाव से गौहत्या पर रोक लगाई
🕉️ गुरु नानक
- जन्म – 1469 ई.
- जन्म स्थान – तलवण्डी (ननकाना साहिब, पंजाब)
- पिता – मेहता कालुजी
- माता – तृप्ता देवी
- पत्नी – सुलखनादेवी
भक्ति विचार
- निर्गुण भक्ति धारा
- जाति-पात में विश्वास नहीं
- ईश्वर – अकाल पुरुष
संगीत व उपदेश
- शिष्य – मरदाना (सारंगी वादक)
- स्वयं रबाब के साथ भजन
यात्राएँ (उदासियाँ)
- भारत, अफगानिस्तान, अरब, फारस
- मक्का, मदीना, श्रीलंका
- कुल 4 उदासियाँ
अन्य तथ्य
अंतिम जीवन – करतारपुर
निधन – करतारपुर
सिख धर्म के प्रथम गुरु
अंतिम जीवन – करतारपुर
निधन – करतारपुर
सिख धर्म के प्रथम गुरु
सिख गुरु परंपरा
- गुरु नानक
- गुरु अंगद
- गुरु अमरदास
- गुरु रामदास
- गुरु अर्जुनदेव (आदिग्रंथ संकलन)
- गुरु हरगोविंद
- गुरु हरराय
- गुरु हरकिशन
- गुरु तेगबहादुर
- गुरु गोविंद सिंह (1699 – खालसा पंथ)
🕉️ चैतन्य महाप्रभु
- जन्म – 1486 ई.
- जन्म स्थान – नदिया (बंगाल)
- पिता – जगन्नाथ मिश्र
- माता – शची देवी
- मूल नाम – विश्वम्भर नाथ
- बाल नाम – निमाई पंडित
गुरु एवं संप्रदाय
- प्रथम गुरु – गंगादास
- वास्तविक गुरु – केशव भारती
- स्थापना – गौड़ीय सम्प्रदाय
दर्शन
- अचिंत्य भेदाभेद
- प्रत्येक जीव कृष्ण भक्ति के योग्य
मान्यताएँ
- अनुयायी इन्हें कृष्ण/विष्णु का अवतार मानते थे
- अन्य नाम – गौरांग महाप्रभु, चैतन्य, बलदेव विद्यासागर
साहित्य
- चैतन्य चरितामृत – कृष्णदास कविराज
- स्वयं द्वारा रचित – शिक्षाष्टक (8 श्लोक)
🕉️ नरसी मेहता
- काल – 15वीं शताब्दी
- जन्म – जूनागढ़, तलजा गाँव (गुजरात)
- पिता – कृष्ण दामोदर
- पत्नी – मणिकबाई
भक्ति एवं साहित्य
- कृष्ण भक्ति
- लगभग एक लाख दोहे
- उपाधि – गुजराती साहित्य का सूरदास
प्रसिद्ध भजन
“वैष्णव जन तो तेने कहिए, पीर पराई जाणे रे…”
प्रमुख ग्रंथ
- श्यामलदास नो विवाह
- श्रृंगारमाला
- हारमाला
- सूरतसंग्राम
- गोविन्दगमन
🕉️ शंकरदेव
- उपाधि – असम का चैतन्य महाप्रभु
- कृष्ण भक्ति के संत
- मूर्ति पूजा के विरोधी
संप्रदाय
- एकशरण सम्प्रदाय की स्थापना
विशेषताएँ
- निर्गुण संत
- संन्यास में विश्वास नहीं
- भगवान की महिला सहयोगिनी को नहीं मानते
- मंदिरों में भागवत पुराण की पूजा

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